ओम का नियम

जब किसी चालक में I धारा प्रवाहित होती है तो चालक के सिरों के मध्य उत्पन्न विभवांतर उसमें प्रवाहित धारा के समानुपाती होता है। अर्थात

V α I

V = RI

जहां R एक समानुपाती नियतांक है जिसे चालक का प्रतिरोध कहते है।