कार्बन

प्राकृतिक रूप से कार्बन फलों, सब्जियों एवं अनाज में प्रचुर रूप से पाया जाता है। इसी प्रकार पेट्रोल, डीजल, केरोसिन, प्राकृतिक गैस, कोयला में भी कार्बन पाया जाता है।
भूपर्पटी में खनिजों ( जैसे हाइड्रोजन कार्बोनेट, कोयला एवं पेट्रोलियम ) के रूप में केवल 0.02% कार्बन उपस्थित है तथा वायुमंडल में 0.03% कार्बन डाइऑक्साइड उपस्थित है। कार्बन का प्रतीक C है। इसकी परमाणु संख्या 6 है। इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 1s22s22p6 है। इसकी संयोजकता 4 होती है। कार्बन की ज्यामिति समचतुष्फलकीय होती है जिसमें चारों संयोजकताएं समचतुष्फल के केंद्र में स्थित होता है। प्रत्येक संयोजकता के मध्य बंध कोण 109°28 का होता है। कार्बन में कार्बन के ही अन्य परमाणुओं के साथ आबंध बनाने की क्षमता होती है। इस गुण श्रृंखलन कहते है। कार्बन परमाणु कार्बन के अन्य परमाणुओं से जुड़कर एकल, द्वि अथवा त्रि-आबंध बना सकते है। कार्बन परमाणुओं के बीच केवल एक आबंध से जुड़े कार्बन के यौगिक संतृप्त यौगिक कहलाते है। द्वि अथवा त्रि-आबंध वाले कार्बन के यौगिक असंतृप्त यौगिक कहलाते है।

कार्बन परमाणु की विद्युतॠणता हाइड्रोजन परमाणु के लगभग समान होने के कारण यह है हाइड्रोजन परमाणु के साथ इलेक्ट्रॉन की बराबर साझेदारी द्वारा सहसंयोजक बंध का निर्माण कर हाइड्रोकार्बन बनाता है। इस प्रक्रिया में कार्बन का अष्टक एवं हाइड्रोजन का निकटतम हीलियम उत्कृष्ट गैसों जैसा द्विक विन्यास प्राप्त हो जाता है।

कार्बन, कालिख, ग्रेफाइट, हीरा, कार्बन की मुक्त अवस्था के उदाहरण है। ये सभी कार्बन तत्व के विभिन्न रूप है, जिन्हें हम कार्बन के अपररूप कहते है।
कार्बन के अपररूप दो प्रकार के होते है-

क्रिस्टलीय अपररूप

कार्बन क्रिस्टलीय के अपररूप में कार्बन परमाणुओं की निश्चित ज्यामिति या संरचना होती है। उदाहरण ग्रेफाइट, हीरा, फुलरीन आदि कार्बन के क्रिस्टलीय अपररूप के उदाहरण है।

अक्रिस्टलीय अपररूप

कार्बन के अक्रिस्टलीय अपररूप में कार्बन परमाणुओं की कोई निश्चित ज्यामिति या संरचना नहीं होती है। उदाहरण के लिए लकड़ी का कोयला, काजल, जान्तव चारकोल, शर्करा चारकोल आदि कार्बन के अक्रिस्टलीय अपररूप के उदाहरण है।