जगत :- मोनेरा

जगत – मोनेरा
इसमें प्रोकैरियोट्स आते है।
{ विशेष :- 🔽प्रोकैरियोट्स :- ऐसे जीवधारी जिनमे केन्द्रक कला नही होती और आनुवंशिक पदार्थ कोशिका द्रव्य में नग्न होता है।ऐसी कोशिकाओं में कोशिकांग जैसे माइटोकोन्ड्रिया , लवक , गोल्जि बॉडी आदि नही पाए जाते। }
➡️मोनेरा में जीवाणु (Bacteriya),माइकोप्लाज्मा, ऐक्टिनोमाइसिटीज,सायनो बैक्टेरिया आते है।
⏹️लक्षण :-
1) मुख्यतया एककोशिकीय।
2)सभी स्थानों जैसे जल,लवणीय मृदा,स्थल,गर्म जल,जंतु और पादप के शरीर में ,सड़े गले पदार्थो आदि में पाए जाते है।
3)लम्बाई :-1माइक्रोन से कुछ माइक्रोन तक।
{ 1 Micron = 1×10^-6 m )
4) कोशिका भित्ति पाई जाती है।
5)कोशिका में संगठित गुणसूत्र नही होते।आनुवंशिक पदार्थ कोशिका द्रव्य में नग्न पड़ा रहता है।
6)कोशिकाओं में कलाबद्ध तथा सुविकसित कोशिकांग का अभाव।
7)इनमें 70 S प्रकार के राइबोसोम पाए जाते है।
{ विशेष :- S का अर्थ – सेवेडबर्ग यूनिट }
8)रिक्तिकाएँ अनुपस्थिति किंतु गैस रिक्तिकाएँ पाई जाती है।
9)प्रजनन :- कायिक & अलैंगिक विधियों द्वारा।
10)श्वसन मिज़ोसोम्स द्वारा।(वायवीय व अवायवीय)
11)पोषण :- स्वपोषी व विषमपोषी।
➡️मोनेरा में (i)आर्किबैक्टीरिया जैसे :- मेथेनोजन्स,हेलोफिल्स,थर्मोएसिडोंफिल्स (ii)यूबैक्टीरिया
जैसे :- सायनोबैक्टीरिया(नोस्टाक,एनाबीना) ,रसायन संश्लेषिबैक्टीरिया आदि आते है।

➡️जीवाणु गोलाकार,दण्डकार,कॉमाकार,सर्पिलाकार होते है।जीवाणु मुख्यतया कोशिका विभाजन द्वारा प्रजनन करते है।विपरीत परिस्थितियों में जीवाणु बीजाणु द्वारा भी प्रजनन करते है।जैसे :- कोकाई जीवाणु।