प्रकाश का परावर्तन

जब प्रकाश किरणें किसी पृष्ठ से टकराकर पुनः उसी मध्य में लौट आती है तो इस परिघटना को प्रकाश का परावर्तन कहते है।

परावर्तन के प्रकार

सामान्यतः परावर्तन दो प्रकार से होता है- नियमित परावर्तन तथा विसरित परावर्तन।

नियमित परावर्तन

जब प्रकाश किरणें किसी चिकने समतल पृष्ठ पर आपतित होती है तब आपतित प्रकाश किरणों को चिकने समतल पृष्ठ द्वारा उसी माध्यम में एक विशिष्ट दिशा में भेज दिया जाता है। इस प्रकार के परिवर्तन को नियमित परावर्तन कहते है।
समतल दर्पण व अन्य चिकने व चमकीले पृष्ठों से नियमित परावर्तन होता है।

विसरित परावर्तन

जब प्रकाश की समांतर किरणें किसी खुरदरी सतह पर आपतित हो तो यह परावर्तन के पश्चात उसी माध्यम में एक विशिष्ट दिशा में न जाकर भिन्न-भिन्न दिशाओं में जाती है तो इस प्रकार के यह नियमित परावर्तन को विसरित परावर्तन कहते है।

विसरित परिवर्तन के कारण ही छायादार पेड़ के नीचे तथा कमरे के अंदर तक प्रकाश प्राप्त होता है। खुरदरे पृष्ठ, धुल, धुएं के सूक्ष्म कण आदि प्रकाश को विभिन्न दिशाओं में विसरित कर देते है।

प्रकाश के परावर्तन के नियम

परावर्तन के दो नियम है।

परावर्तन का प्रथम नियम

आपतन कोण सदैव परावर्तन कोण के बराबर होता है।

परावर्तन का द्वितीय नियम

आपतित किरण, परावर्तित किरण तथा आपतन बिंदु पर अभिलंब एक ही तल में स्थित होते है।