प्रभाजी आसवन

जब दो या दो से अधिक द्रवों के क्वथनांकों का अंतर 50 डिग्री सेल्सियस से कम हो तो उनका पृथक्करण प्रभाजी आसवन विधि द्वारा किया जाता है। इस विधि में मिश्रण को गर्म करने पर प्रत्येक द्रव उसके क्वथनांक पर वाष्पित होता है। इनकी वाष्प को प्रभाज स्तंभ से गुजार कर संघनित करने पर भिन्न-भिन्न द्रव प्राप्त होते है। पहले कम क्वथनांक वाला तथा बाद में अधिक क्वथनांक वाला द्रव प्राप्त होता है। उदाहरण के लिए पेट्रोलियम के प्रभाजी आसवन से भिन्न भिन्न अवयव जैसे पेट्रोल, डीजल, केरोसिन, वैसलीन आदि पृथक किए जाते है। प्रभाजी आसवन के द्वारा ही बेंजीन-टाॅलुईन, ऐथिल अल्कोहल-जल का पृथक्करण किया जाता है।