मरुद्भिद् पादप

मरुद्भिद् पादप शुष्क एवं जलाभाव वाले आवासों में पाए जाते है। जैसे- नागफनी, थोर, कैक्टस, खेजड़ी, केर, आक, ग्वारपाठा आदि।
इन पादपों की जड़ें जल प्राप्ति के लिए अत्यधिक गहरी, सुविकसित होती है। जड़ों में मूल रोम व मूल गोप होते है। इन पादपों का तना काष्ठीय होता है जिस पर बहुकोशिक रोम होते है। कुछ पादपों जैसे आक के तने पर मोम और सिलिका का आवरण होता है। कुछ मरुद्भिद् पादपों का तना हरा होता है जो जल संग्रह व प्रकाश संश्लेषण का कार्य करता है, जैसे- ग्वारापाठा। मरुस्थ्लीय पौधे वाष्पोत्सर्जन द्वारा जल की बहुत कम मात्रा निष्कासित करते हैं।

मरुस्थ्लीय पौधे वाष्पोत्सर्जन द्वारा जल की बहुत कम मात्रा निष्कासित करते हैं। मरुस्थलीय पौधों में पत्तियां या तो अनुपस्थित होती है या बहुत छोटी होती है। कुछ पौधों में पत्तियां कांटो के रूप में होती है जैसे नागफनी। जिससे वाष्पोत्सर्जन कम होता है। कई पादपों में पत्तियों पर भी मोम की परत पायी जाती है तथा रन्ध्र पत्तियों के नीचे की सतह पर पायी जाती है। गर्ती रन्ध्र पाये जाते है। इनमें फलों व बीजों के चारों ओर कठोर आवरण पाया जाता है। मरुद्भिद पादपों की कोशिकाओं में परासरण सान्द्रता अधिक होती है।