लवणमृदोद्भिद् पादप

लवण युक्त मृदा या दलदल में पाए जाने वाले पादप लवणमृदोद्भिद् पादप कहलाते है। जैसे- राइजोफोरा, सालसोला।
इन पादपों की जड़े कम गहरी होती है। इसलिए स्तम्भ मूल परिवर्धित होकर दलदल में प्रवेश करके पादप को अतिरिक्त सहारा व स्थिरता प्रदान करती है। इन पादपों के जड़ें श्वसन के लिए ऑक्सीजन सहारा व स्थिरता प्रदान करती है। इन पादपों के जड़ें श्वसन के लिए ऑक्सीजन प्राप्ति के लिए भूमि से ऊपर आ जाती है तथा ऋणात्मक गुरुत्वानुवर्ती होती है। जड़ों के शीर्ष पर श्वसन के लिए सूक्ष्म रंध्र होते है जिनसे पादपों में ऑक्सीजन की पूर्ति होती है।

इन जड़ों को श्वसन मूलें या न्यूमेटोफोर कहते है। इनके तने क्लोराइड आयनों के संग्रह के लिए गुदेदार होते है। पत्तियां छोटी, मांसल व चमकीली सतह वाली होती है। इन पादपों में बीज का अंकुरण फल के भीतर होता है व बीज से बीजपत्राधार व मूलांकुर बनने के पश्चात् नवोद्भिद उर्ध्वाधर स्थिति में भूमि पर गिर जाता है, जिससे मूलांकुर सीधा कीचड़ में घुस जाता है। इस प्रकार के अंकुरण को सजीव प्रजक या जरायुज अंकुरण कहते है।