विस्थापन

किसी कण की प्रारंभिक व अंतिम स्थिति को मिलाने वाली रेखा की सीधी लंबाई को विस्थापन कहते है। विस्थापन में परिमाण व दिशा दोनों होते हैं अतः विस्थापन एक सदिश राशि है। कण की प्रारंभिक स्थिति से अंतिम स्थिति को मिलाने वाला सदिश विस्थापन सदिश कहलाता है। विस्थापन का परिमाण गतिमान वस्तु द्वारा चली गई पथ-लंबाई के बराबर हो भी सकता है और नहीं भी हो सकता है। एक गतिशील कण के लिए समय के साथ पथ-लंबाई सदैव बढ़ती रहती है जबकि विस्थापन बढ़ या घट सकता है। SI पद्धति में विस्थापन का मात्रक मीटर है। विस्थापन का विमीय सूत्र [ M0L1T0 ] है। किसी कण का विस्थापन धनात्मक, ऋणात्मक या शून्य हो सकता है।

माना एक कण P त्रिज्या r के वृत्ताकार पथ में चित्र ( 1 ) में दर्शाए अनुसार चक्कर लगा रहा है।

विस्थापन
इस स्थिति में:
• एक पूर्ण परिक्रमण में विस्थापन शून्य होगा।
• एक अर्ध चक्र में कण का विस्थापन πr मीटर होगा।

किसी कण का विस्थापन Δx निम्नलिखित सूत्र से दिया जाता है,
Δx = x2 – x1
यहां,
x1 = कण की प्रारंभिक स्थिति।
x2 = कण की अंतिम स्थिति।