वृत्तीय गति या वर्तुल गति

किसी वृत्ताकार पथ में होने वाली गति को वृत्तीय गति या वर्तुल गति ( Circular Motion ) कहते है। सूर्य के चारों ओर पृथ्वी की गति , वृत्ताकार पथ पर खिलौना ट्रेन की गति आदि वर्तुल गति ( Circular Motion ) के उदाहरण है।

जब कोई कण एकसमान चाल से वृतीय गति करता है तो इसके वेग में निरंतर परिवर्तन से इसमें त्वरण उत्पन्न होता है जिसे अभिकेन्द्र त्वरण (centripetal acceleration) कहते है। यह त्वरण सदैव वृतीय पथ के केंद्र की ओर होता है। अत: एकसमान चाल से त्वरित गति तभी संभव है जब कण पर एक नियत बल लग रहा हो। कण पर कार्यरत इस बल की दिशा सदैव केंद्र की ओर होती है जिसे अभिकेन्द्रीय बल (centripetal force) कहते है।

इसी अभिकेन्द्रीय बल की उपस्थिति के कारण ही कण वृतीय गति कर पाता है अन्यथा कण वृतीय पथ की स्पर्श रेखा की दिशा में दूर चला जाता है।

वृत्तीय गति कर रहे कण का कोणीय वेग ω निम्नलिखित सूत्र से दिया जाता है,
ω= dθ/dt
यहां,
dθ = कोणीय विस्थापन।
dt = समय।

वृत्तीय गति कर रहे कण का कोणीय त्वरण α निम्नलिखित सूत्र से दिया जाता है,
α= dω/dt
यहां,
dω = कोणीय वेग।
dt = समय।