संरक्षी बल

पिंड पर आरोपित [[बल]] (force) संरक्षी होगा। यदि-

  • बल (Force) द्वारा किया गया कार्य (work) केवल पथ पर निर्भर करे।
  • बल द्वारा बंद पथ में किया गया work शून्य हो।
  • बल इस प्रकार कार्यरत हो कि पिंड को अपनी आरंभिक अवस्था में लौटने पर वही गतिज ऊर्जा ( kinetic energy) प्राप्त हो जो आरंभ में थी अर्थात सम्पूर्ण चक्रीय प्रक्रम में गतिज ( kinetic energy) नियत हो।