स्तंभ ( तना )

[[पादप]] अक्ष के आरोही भाग, जिसकी उत्पत्ति भ्रूण के प्रांकुर से होती है, स्तंभ या तना कहलाता है। तना ऋणात्मक गुरुत्वानुवर्ती तथा धनात्मक प्रकाशानुवर्ती होता है। तरुण तना प्रायः हरा होता है बाद में वह काष्ठीय या भूरा हो जाता है।

तने के कार्य

  • तने का मुख्य कार्य जड़ों द्वारा अवशोषित जल व खनिज लवणों का संवहन कर उसे पौधे के विभिन्न भागों तक पहुंचाना है।
  • तना पत्तियां, फूल, फल आदि धारण करता है।
  • पत्तियों में निर्मित भोज्य पदार्थों का संचयन
  • हरे तनों में उपस्थित क्लोरोफिल द्वारा प्रकाश संश्लेषण कर भोज्य पदार्थ बनाना जैसे- शतावरी
  • मरुस्थलीय पौधों में जल संग्रह कर उसे अनुकूलित करना जैसे-थूर
  • कायिक जनन करना जैसे- गुलाब, चमेली
  • सहारा प्रदान करना जैसे- पीलवान
  • तने पर उपस्थित कंटक पौधों की जानवर जानवरों से रक्षा करते है।
  • आलू, अदरक, हल्दी आदि भूमिगत तने के रूपांतरण है जो भोजन संग्रहण का कार्य है।