स्थतिज ऊर्जा

स्थतिज ऊर्जा (Potential energy)

किसी पिंड में उसकी स्थिति अथवा अभिविन्यास के कारण जो ऊर्जा होती है उसे स्थितिज ऊर्जा कहते है। स्थितिज ऊर्जा पिंड में संग्रहीत ऊर्जा के रुप में होती है। खिंचे हुए धनुष के तार में, किसी उँचाई पर रखे गये पिंड में स्थितिज ऊर्जा होती है।

किसी संरक्षी बल F के लिये, स्थितिज ऊर्जा में परिवर्तन ΔU बल द्वारा किये गये ऋणात्मक कार्य के बराबर होता है।

जब किसी पिंड को बिना गति प्रदान किये पृथ्वी सतह से h उँचाई ऊपर उठाया जाता है तो बाह्य कारक द्वारा गुरुत्वाकर्षण बल के विरुद्ध किया गया कार्य mgh होगा। यह कार्य स्थितिज ऊर्जा के रुप में संचित होगा।

यदि पिंड को मुक्त रुप से छोड़ा जाता है तो गति के तृतीय नियम से

अर्थात पिंड को मुक्त रुप से छोड़ने पर इसमें संचित स्थितिज ऊर्जा, गतिज ऊर्जा के रुप में परिवर्तित हो जाती है।

स्थितिज ऊर्जा ऋणात्मक अथवा धनात्मक हो सकती है। स्थितिज ऊर्जा निर्देश तंत्र पर निर्भर करती है। स्थितिज ऊर्जा एक अदिश राशि है इसका SI मात्रक Joule है।